योग द्वारा जीवन जीने की कला "The art of living life through yoga"

https://www.yogadeyy.com/2020/01/art-of-living-life-through-yoga

सम्भवतः लोगों ने योग का अर्थ केवल व्यायाम, योगासन, प्राणायाम या शारीरिक क्रिया को समझ रखा है ! लेकिन अगर हम योग को गहराई को समझ सकते हैं और उसका वास्तविक अर्थ निकाल सकते तो इसे हम जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि बना लेते ! योग से हम मात्र शारीरिक, मानसिक व भौतिक उछता ही प्राप्त ही नहीं करते हैं वरन अपने जीवन की राह को सुखी और समृद्ध क्र पुरे परिवार को सम्पूर्ण लक्ष्य दे सकते हैं एवं आध्त्यमिकता के चरम शिखर को भी छू सकते हैं ! अपने व्यक्तित्व में योग के साथ जीने की कला भी सीखनी चाहिए, ताकि आप इसे साधक के रूप में आत्मसात क्र सके !

1. यह एक नियम है की हम जैसा सोचते हैं, शरीर में वैसा ही घटित होता है ! उदाहरण के तौर पर हम देखते हैं कि जैसे ही हमे क्रोध आता है हमारे हाव- भाव वैसे ही होने लगते हैं ! भौंहों तन जाती हैं रक्त संचार बढ़ जाता है ! मांशपेशियां खिंच जाती हैं ! शरीर में एकत्रित ऊर्जा अनावश्यक रूप से नस्ट होती है जिससे मानसिक तनाव बढ़ जाता है ! हमारे आस - पास का परिवेश वातावरण भी खराब हो जाता है ! हमारी छवि बिगड़ जाती है और नकारत्मकता का प्रवेश हो जाता है ! शरीर में एक प्रकार के विष का निर्माण होता है जो नुकसानदायक होता है ! हमेशा क्रोध करते रहने से शरीर की रोग प्रतिरोधक छमता कम हो जाती है ! जिससे शरीर जल्द ही कमजोर हो जाता है और आसानी से रोगग्रस्त होने लगता है ! जीवन में हमारे साथ कई बातें घटित होती हैं ! हम शारीरिक और मानसिक रूप से ग्रसित व आर्थिक रूप से भी कमजोर हो जाते हैं ! तो हमारे मित्र भी वैसे बनते हैं कई बार गलत आदतें भी पद जाती हैं जैसे नशे की लत ! इससे दमकते चेहरे भी मुरझा जाते हैं ! हम आहार लेते हैं लेकिन शरीर पर उसका सकारत्मक असर नहीं दिखता ! दिनों- दिन हालत बद्तर होती जाती है ! परिवार टूट जाते हैं बच्चे संस्कारवान नहीं बन पाते ! समाज तिरस्कार दृस्टि से देखने लगता है इससे हम उपेच्छाओं के शिकार को जाते हैं ! संसार से ऊब जाते हैं और जीवन अर्थहीन लगने लगता है ! सुबह से शाम तक चिंता सताती है तथा रात्रि में नींद भी नहीं आती जीवन दवाइयों के सहारे चलता है ! चारो ओर निराशा नज़र आती है ! तो क्या हम इस लिए पैदा हुए हैं ? तो क्या हम बाकि जिंदगी में कुछ नहीं कर पाएंगे ? 
कौन कहता है अब तुम कुछ नहीं कर पाओगे ? कौन कहता है की अब तुम कुछ नहीं हो ? 
नहीं, तुम बहुत कुछ हो !
तुम आज भी वैसे हो ! अनंत शक्तियों के पुंज हो ! तुम्हारी आत्मा में कोई अवगुण नहीं हैं ! जो भी अवगुण आये थे, वे सब बाहर से ही आये थे और बाहर ही छूट जायेंगे ! तुम्हारे अंदर अनंत ज्ञान है ! तुम सच्चे इंसान हो, तुम्हारे अंदर बहुत साडी छमताएँ हैं, उन्हें विकसित करो ! तुम्हारे अंदर सुःख का भंडार है ! उठो, अभी! पूरे जोश के साथ उठो, अच्छा करने लगो, मत देखो जमाने को ! जमाना तुम्हारा साथ तब देगा, जब तुम उनको विश्वास में ले लोगे ! 

अकेले ही संघर्ष करो ! तुम्हारे साथ अदृस्य शक्तियां हैं ! तुम्हारे पूर्वजों की किरणें हैं ! 'नियम ले लो ' अभी से तुम्हारे अंदर नई चेतना का प्रादुर्भाव होगा !

संकल्प ले लो कि आज से मैं नए जीवन की शुरुवात करूंगा, क्रोध नहीं करूंगा, मांसाहार का सेवन नहीं करूंगा, नशा नहीं करूंगा, अपशब्द नहीं बोलूंगा ! कहो की अहंकार का मैं त्याग करता हूँ, माया से मैं मुक्ति चाहता हूँ, और लोभ को छोंड़ना चाहता हूँ ! 
अब मई अपनी शुद्धता के साथ ही विचरण करूंगा !

मैं सबसे प्रेम करूंगा, सबको स्नेह दूंगा ! किसी से कोई अपेच्छा नहीं करूंगा, सबको वातसल्य दूंगा ! ऐसा करने पर आप देखेंगे कि आपके चारों ओर शांति ही शांति है, शुद्ध वातावरण है ! आपका मान- सम्मान बढ़ गया !आप मुस्कुराते हैं तो आपको देखकर पूरा विश्व मुस्कुराता है ! 
कुछ दिनों बाद आप देखेंगे की आपका शरीर पहले से अच्छा हो गया है ! मानसिक रूप से आप अधिक स्वस्थ्य हो गए हैं ! आप स्वयं ही दूसरों की नज़रो में भी उठ गए हैं ! आप हर प्रकार से अच्छे हो गए हैं !

यह छोटा सा उदाहरण देने का हमारा उद्द्देस्य सिर्फ इतना है, कि हम जैसा सोचते हैं, हमारे इस शरीर में वैसे ही रासायनिक तत्वों का निर्माण होने लगता है ! हमारी सोच अच्छी होगी तो ऐसे रासायनों का निर्माण होगा जो अमृततुल्य होंगे जो कि हमे इस समय से लेकर मृत्यु पर्यन्त हर प्रकार की पोषकता प्रदान करेंगे ! तो क्यों न हम आज से ही सब कुछ बदल लें और यम, नियम को अपने जीवन में अपना लें !
https://www.yogadeyy.com/2020/01/art-of-living-life-through-yoga

2. उपनिषद में लिखा है कि यथा 'पिण्डे तथा ब्रम्हांडे' इस छोटे से वाक्य में अनगिनत बातें छिपी हैं ! हमारा यह शरीर ब्रम्हांड की अभिव्यक्ति है ! जो तत्व एवं शक्तियाँ इस ब्रह्म्हाण्ड का निर्माण करती हैं, वहीं हमारे शरीर मस्तिष्क और सूछ्म शरीर का भी निर्माण करती हैं ! आप और हम देखते हैं कि प्रकृति का वातावरण असुंतलित हो रहा है ! जिस कारण से हमारा ब्रह्माण्ड भी बीमार हो गया है एवं जहाँ- तहाँ प्राकृतिक विपदाएं भी दिखाई दे रही हैं ! इसी प्रकार यदि हमारा खान- पान, रहन-सहन भी असुंतलित होगा तो यह शरीर तथा मस्तिष्क भी रोगयुक्त हो जायेगा ! हम पराधीन हो जायेंगे ! इसलिए संतुलित जीवन जियें, बेफिक्र हो जाएं ! इस प्रकार हमे अपने जीवन का अंदाज बदलकर और योग को आत्मसात कर हम इस जीवन को सफल एवं सुंदरम बना सकते हैं !

"The art of living life through yoga" 
https://www.yogadeyy.com/2020/01/art-of-living-life-through-yoga

Possibly people have understood the meaning of yoga as only exercise, yogasana, pranayama or physical activity. But if we could understand yoga deeply and find its true meaning, then we would have made it the greatest achievement of life. With yoga, we not only achieve physical, mental and physical jumping, but can give complete goals to our happy and prosperous family in the way of life and can also touch the peak of spirituality. One should also learn the art of living with yoga in his personality,
So that you can assimilate it as a seeker.

1. It is a rule that what we think happens in the body! As an example, we see that as soon as we get angry our gestures start happening. Eyebrows swell, blood circulation increases. Muscles are pulled. The energy collected in the body is unnecessarily nast which increases mental stress! The ambient environment around us also gets spoiled. Our image deteriorates and negativity enters! A type of toxin is produced in the body. Which is harmful! Resistance to the body reduces the resistance to disease. Due to which the body becomes weak soon and easily becomes diseased. Many things happen to us in life! We become physically and mentally afflicted and financially weak too. So our friends also become like that many times wrong habits also get postured like addictive. This makes even glowing faces wither away. We take food but it does not have a positive effect on the body! The condition gets worse day by day. Families break up, children are unable to become sanskarwans. Society starts to look disdainfully, this makes us go to the victim of neglects! Bored with the world and life seems meaningless! There is worry from morning to evening and no sleep at night, life goes on with medicines! Disappointment is seen everywhere! So are we born for this? Will we not be able to do anything in the rest of our life.
Who says you won't be able to do anything now. Who says you are nothing now?
No, you are a lot.
You are still like that today May the powers of infinite powers There are no demerits in your soul! All the demerits who came, they all came from outside and they will be left outside! There is infinite knowledge inside you! You are a real person, you have a lot of flatteries, develop them! There is a store of happiness inside you! Wake up now Wake up with full vigor, start doing well, don't look back! The world will support you only when you take them in confidence.
Struggle alone You have invisible powers! Your ancestors have rays! 'Take the rules' From now on, new consciousness will emerge in you.
Take a pledge that from today I will start a new life, I will not be angry, I will not consume meat, I will not take drugs, I will not speak abusive words! Say that I renounce my ego, I want freedom from illusion, and I want to break greed.
Now I will move with my purity.
I will love everyone, give affection to everyone! I will not expect anything from anyone, will give everyone a chance! On doing this you will see that peace is peace around you, pure atmosphere! Your honor has increased! When you smile, the whole world smiles upon seeing you.
After a few days you will see that your body has become better already! You have become more mentally healthy! You yourself have risen in the eyes of others too! You have become good in every way.

Our aim is to give this small example, that just like we think, chemical elements start forming in our body in the same way! If our thinking is good, then such chemicals will be produced which will be nectar-like which will provide us with all kinds of nutrients from this time till death! So why don't we change everything from today and adopt Yama, the rule in our life.

2. It is written in the Upanishads that countless things are hidden in this short sentence like 'Pinde and Brahmande'! This body of ours is an expression of the universe! The elements and powers that make up this universe, our body also creates the brain and the subtle body! You and we see that the environment of nature is getting unstructured! Due to which our universe has also become ill and natural calamities are visible everywhere. Similarly, if our food and living habits are also unstable. 
Due to which our universe has also become ill and natural calamities are visible everywhere. Similarly, if our food and living habits are also unstable, then this body and brain will also become diseased. We will be under control! So live a balanced life, be carefree! In this way we can make this life successful and beautiful by changing the way we live and imbibing yoga.


Post a Comment

0 Comments