योगासनों का शरीर के अंगों पर पड़ने वाला प्रभाव (Effects of yogasana on body parts)

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यह बात बिलकुल सत्य है की हमारे ऋषि मुनियों का ज्ञान अथाह था ! लेकिन होता यह है की हम उनके ज्ञान की पराकाष्ठा की तुलना अपने ज्ञान से करते हैं और उनके ज्ञान को तर्क वितर्क करके गलत साबित कर देते हैं या फिर पशिचमी देशों के वैज्ञानिकों की बात मान लेते हैं ! वो कहते हैं ! वो कहते है प्राचीन संतो ने गलत कहा तो हम गलत मान लेते हैं और यदि वे कहते हैं कि तुम्हारे ऋषियों ने सही कहा तो हम सही मान लेते हैं ! हम अपने दिमाग को सकारात्मक तरीके लगाना ही नहीं चाहते ! अब हम योग को देख लें लाखों वर्षों से हमारे यहां यही परम्परा चली आ रही थी ! हमने कई दशक पूर्व से अपने अज्ञान ालश के कारण योगासनों में ध्यान देना बंद कर दिया था या कोई करता था तो हम हँसते थे, और सामने वाला भी कई बार इसी कारण से करना छोड़ देता था ! अब चूँकि पश्चिंमी देश के लोगों ने अपनाना चालू कर दिया तो हमारी भी आँखें खुल गयीं ! यह बात सिर्फ योगासन की ही नहीं थी बल्कि कई बातें हम अभी भी नहीं मानते जैसे महान आत्माओ ने कहा है कि रात्रि भोजन और मध्य मांस का सेवन नहीं करना चाहिए ! ऐसी कई बाते हैं जिन्हे हम अनदेखा कर रहे हैं ! अब हम रात्रि भोजन का वैज्ञानिक कारण देखें तो डाक्टरों का भी कहना है की सोने से चार घंटे पहले भोजन कर लेना चाहिए ! यदि हम भोजन करके तुरंत सो जाते हैं तो भोजन पचेगा नहीं ! रात भर उदर में पड़ा रहेगा, भोजन सड़ेगा ! हमारी उदर क्रिया पूर्ण रूप से विटामिन, प्रोटीन का शोषण  और अपना कार्य नहीं कर पाती ! पेट को कभी विश्राम ही नहीं मिल पाता ! भोजन पच नहीं रहा तो वायु विकार उतपन्न होते हैं, जिससे कई तरह की बीमारियाँ होने की संभावना रहती है !

अतः आचार्यों ने सोने के चार घंटे पहले भोजन करने को कहा है ! यदि हम यह वैज्ञानिक कारण जाने तो पाएंगे कि हम उन चार घंटो में काफी परिश्रम कर चुके होते हैं जिससे भोजन को पचने में समस्या नहीं हो पाती !

शाकाहार पर आचार्यों ने बताया कि शाकाहार पूर्णतः सुपाच्य होने के साथ- साथ हमे शारीरिक, मानसिक व आध्त्यमिक ऊर्जा भी प्रदान करता है और हम कई प्रकार के पाप दोषों से बच जाते हैं ! हमारे अंदर तमकसीता नहीं उतपन्न हो पाती क्योकि कहा है कि "जैसा कहो अन्न वैसा बने मन !" अच्छे आहार से अच्छे विचार आते हैं ! घर के वातावरण में सुख व् शांति रहती है !

अत्याधिक वासना करने से हम कई प्रकार की बीमारियों से घिर जाते हैं ! शरीर का आज- तेज नष्ट हो जाता है ! चेहरे की कांति खत्म हो जाती है ! चेहरा झुर्रियों से भर जाता है ! शरीर कमजोर हो जाता है ! मानसिक कमजोरियां हो जाती हैं ! आँखों में फर्क दिखने लगता है ! हाथ पैर कमजोर हो जाते हैं ! यादाश्त कमजोर हो जाती है  ! आधुनिक शोधों से ज्ञात हुआ है अत्यधिक वासना से मस्तिष्क सिकुड़ने लगता है !

ऐसी सैकड़ो चीज़ें हमारे ऋषि-मुनियों, संतो-आचर्यों ने बतायीं यदि हम उनकी बात आत्मसात करें तो हमारे जीवन में बहुत बड़ा परिवर्तन हो सकता है !

English Language:-

     "Effects of yogasana on body parts" 

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It is absolutely true that the knowledge of our sages was incomparable. But what happens is that we compare the culmination of their knowledge with their knowledge and prove their knowledge wrong by arguing or agree with the scientists of western countries. They say They say that the ancient saints said wrong, then we believe it wrong and if they say that your sages said it right then we believe it right. We do not want to put our minds to positive ways. Now let us look at yoga, this tradition was going on in us for millions of years. We had stopped meditating in Yogasanas due to our ignorance many decades ago or if someone did, we used to laugh, and the one in front also stopped doing it many times for the same reason. Now, as the people of western country started adopting, our eyes were also opened. This was not only about Yogasan but we still do not believe many things like great souls have said that dinner and middle meat should not be consumed. There are many things that we are ignoring. Now, if we see the scientific reason for dinner, the doctors also say that you should have food four hours before bedtime. If we eat and sleep immediately, then the food will not be digested. Will stay in the stomach overnight, food will be rotten. Our abdominal function is not able to fully exploit vitamins, proteins and perform its function! The stomach never gets rest. If food is not digested, air disorders arise, due to which many kinds of diseases are likely.

Therefore, the Acharyas have asked to eat four hours before bedtime. If we know this scientific reason, then we will find that we have worked hard in those four hours due to which there is no problem in digesting food.

On vegetarianism, the Acharyas said that vegetarianism is completely digestible, as well as provides us with physical, mental and spiritual energy and we are saved from many kinds of sins. In us, Tamaksita could not be created because it is said that "whatever you say, become a grain of mind!" Good ideas come from a good diet. There is happiness and peace in the home environment.

Due to excessive lust we are surrounded by many types of diseases. Today - the sharpness of the body is destroyed. The radian of the face is gone. Face is wrinkled. The body becomes weak! Mental weaknesses occur. There is a difference in eyes! Hands and feet become weak. Memory gets weak. Modern research has shown that the brain starts shrinking due to excessive lust.

Hundreds of such things were told by our sages, saints and ascetics, if we imbibe them, a big change can happen in our lives.



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