सरल व्यायाम कैसे करें (How to do simple exercises)

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एक बात हमे अच्छे से समझनी है कि कोई भी काम एकदम से भी होता है ! इसके लिए अभ्यास की जरूरत पड़ती है ! चाहे वह योगासन हो या कोई भी कसरत सुबह शरीर कड़ा (जकड़ा) रहता है, इस कारण आसनों का अभ्यास आसानी से नहीं हो पता ! इसके लिए हमे शरीर ढीला (लचीला) करने एवं योगासन की तयारी के लिए कुछ सूकस्चम व्यायाम कर लेने चाहिए जिससे आसनों के अभ्यास में सरलता एवं किसी परार के दुष्प्रभाव न हो ! वैसे योगाचर्यों के मतानुसार सूकस्चम व्यायाम सूक्स्चंप्राण का नियमित विकाश करता है एवं नामानुसार शरीर को संतुलित भी करता है !

1. दोनों पैर को मिलाकर (समयास्था) हाथ जोड़कर अंगूठे को कंठकूप पर स्थापित करें ! भुजवलियों से वसक्छ स्थल को दबाएं ! स्वाश सामान्य रखें मन एकाग्र होने पर हाथों  को ढीला छोड़े, कम से कम आधा मिनट भगवान का ध्यान करें श्वाश और मन एकाग्र करें !

 2.समयास्था में खड़े हों ! बाएं हाथ की कनिश्ठका अनामिका मध्य्मा और दर्जनी चारों को गले पर स्थापित करें करतल भाग अंदर की ओर रखें दाहिनें हाथ की दर्जनी को बांये पर उल्टा स्थापित करें, दोनों हाथों को कंधो के सीध में रखें गर्दन को इसी अवस्था में रखते हुए हाथों को बाजू से पूर्व अवस्था में लावें ! २५ बार सीने के बल श्वाश-प्रश्वाश करें, क्रिया को समाप्त करें ध्यान विशुद्ध चक्र या कंठ पर केंद्रित करें !
                     
3. समयास्था में खड़े हों ! गर्दन को धीरे-धीरे पर ऊपर ले जाएँ ! भूमध्य (दोनों भौंहों के बिच) में देखे, क्रिया को इस कल्पना के साथ कीजिये जैसे दुबुद्धि हटकर उनका विकाश हो एवं व  तीव्र प्रखर हो, २५ बार श्वाश-प्रश्वाश सीने के बल करें ! ध्यान को सीखा मंडल या छोटी पर केंद्रित करें !

4. समयास्था में खड़े रहें पैर अंगूठे की सीध में नीचे की ओर अनुमानतः ४ फिट दूरी पर रखें ! क्रिया को इस कल्पना के साथ करें कि विस्मरण को दूर कर स्मरण शक्ति तीव्र और प्रखर कर रहें हैं तथा इसका विकाश कर रहे हैं ! २५ बार सीने के बल श्वाश-प्रश्वाश करें ! ध्यान को तालु स्थान पर रखें !

5. समयास्था में खड़े रहें ! ठुड्डी कंठ में लगाए नेत्र बंद रखें ! २५ बार श्वाश-प्रश्वाश सीने के बल करें ! ध्यान को गर्दन के पीछे गठीले स्थान पर (मेधा चक्र) केंद्रित करें ! क्रिया को समाप्त कर पूर्व स्थित में आयें !

6. समयास्था में खड़े ! रहें नाक के अगर भाग को देखते हुए गर्दन को धीरे-धीरे पीछे की ओर ले जाएं ! टीका बिंदी तिलक लगाने वाले स्थान को लगातार अपलक देखना है, आँशू आने पर वैसे ही सूखने दें श्वाश को सामन्य रखें धीरे- धीरे मूल स्थित में वापस आ जाएँ ! ध्यान नेत्रों पर रखें !

7.समयास्था में खड़े रहें ! हाथों की अंगुलियों को परस्पर मिलाएं अंगूठे से नाक बंद रखें, गर्दन को ऊपर ले जाये ! मुँह को कांक चोंच की तरह बनाये जिस तरह सीटी बजते हैं ! अब आठ अंक मन में गिनते हुए मुँह से श्वास अंदर खींचें तुरंत मुख को बंद करें ! गलों को फुलाएं ! नेत्र बंद रखें ठुड्डी, कंठकूप से लगाएं ! ३२ अंक तक मन में गिनते हुए श्वाश को रोकें तत्प्श्चात गर्दन सीधी कर अंगूठा हटकर १६ अंक मन में गिनते हुए नाक से श्वास बाहर छोड़े ! श्वाश रोकते समय कनिश्ठका सीने पर रखें ! दोनों हाथ को कंधों के सीध में रखें क्रिया को तीन बार दोहराएं !
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लाभ:-

1. मन की एकाग्रता बढ़ेगी !
2. मानसिक रोग ठीक होते हैं !
3. मस्तिष्क के विकार ठीक होते हैं ! 
4. विचार शक्ति की वृद्धि होती है ! 
5. शारीरिक व मानसिक छमता बढ़ती है !
6. बुद्धि विकसित होती है !
7. मानसिक शक्ति तीव्र होती है !
8. मस्तिष्क की थकान और विस्मृति दूर होती है !
9. कंठ की ग्रंथियों की शुद्धि होती है ! 
10. साधक का शरीर फुर्तीला व आकर्षक बनता है !
11. नेत्र की ज्योति बढ़ती है, आँखों में आँशू आना, कम दिखाई देना आदि विकार नष्ट होते हैं !
12. इसके निरंतर अभ्यास का समय बढ़ाने से चश्मा छूट सकता है !
13. साधक दीर्घायु बनता है !
14. प्यास शांत होती है !

English Language:-

 "How to do simple exercises"

One thing we have to understand is that any work is done from the very beginning! This requires practice! Whether it is Yogasana or any workout, the body remains stiff in the morning, due to this, the practice of asanas is not easy. For this, we should do some tsukasham exercises to make the body loose (flexible) and to prepare for yoga asana so that there is no simplicity in the practice of asanas and no side effects. By the way, according to the yogis, Sukascham exercise regularly promotes self-stimulation and also balances the body according to its name.
 
1. Place the thumb on the joint at the joint with both hands (Samyasth). Press the site with the Bhujvalis. Keep the breath normal; When the mind is concentrated, leave the hands loose, meditate on God for at least half a minute, and the mind should concentrate.

 2. Stand in time! Install Kanishka Anamika Madhyamma and Dastani four on the neck of the left hand, keep the lattice part in. Install the Dhani of the right hand on the left side, keep both hands in line with the shoulders while keeping the neck in the same position with the hands on the side. Launch in the former state. Breathe in the chest 25 times, finish the action, concentrate on the pure chakra or throat.
                       
3. Stand in time. Move the neck slowly up. Look at the Mediterranean (between the two eyebrows), do the action with the imagination that as the intellect is removed and they are sharpened and intense, make the breath 25 times on the chest! Focus attention on learned circles or small.

4. Stand in time, keep your toes facing down, presumably at a distance of 4 feet. Do the action with the imagination that by removing forgetfulness, the memory power is intense and intense and is developing it. Breath on the chest 25 times! Keep meditation in a palate position.

5. Stand in time. Keep the eyes closed in the chin girdle. Breathe 25 times on your chest Concentrate the meditation on the area behind the neck (Medha Chakra). Finish the action and return to the previous position.

6. Stand in time. While looking at the part of the nose, move the neck slowly backwards. The place where the Tika Bindi Tilak is applied is to be seen continuously, let it dry in the same way as the tears come, keep the breath normal, slowly return to the original position! Take care on the eyes.

7. Stand in time. Join hands fingers together, keep the nose closed with the thumb, move the neck up. Make the mouth like a throbbing whistle. Now counting the eight digits in the mind, draw the breath through the mouth and immediately close the mouth! Inflate the throats. Keep the eyes closed chin, apply it with a cauldron. Stop breathing by counting in the mind up to 32 points, then after straightening the neck, remove the thumb from the nose by counting the 14 points in the mind. Keep Kanishka on the chest while stopping the breath! Keep both hands in line with the shoulders, repeat the action three times.

Benefit:-

1. Concentration of mind will increase.
2. Mental diseases are cured.
3. Brain disorders are cured.
4. Thought power increases.
5. Physical and mental effervescence increases.
6. Wisdom develops.
7. Mental strength is intense.
8. Brain fatigue and forgetfulness are gone.
9. The glands of the throat are purified.
10. The body of the seeker becomes agile and attractive.
11. The light of the eye increases, tears in the eyes, low vision etc. disorders are destroyed.
12. Increasing its continuous practice time can cause eyeglasses.
13. The seeker becomes longevity!
14. Thirst Calms.


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