त्राटक योग कैसे करें, How to do trataka yoga

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आप एक ऐसे स्थान का चयन कीजिये जो साफ़ सूंदर व शांतिमय हो तथा वातावरण भी अच्छा हो ! वहां जब तक आप अभ्यास करें तब तक किसी प्रकार का विघ्न न होने पाए

त्राटक करने की वस्तु से लगभग चार फ़ीट दूर सुखासन में बैठिये ! सबसे पहले मोमबत्ती जलाइये और इसको उचित दूरी पर रखिये (मोमबत्ती और आँखें समक्छ होना चाहिए) यदि कमरे में हवा का आगमन अधिक होगा तो मोमबत्ती की लौ हिलेगी जिससे आँखें में विकार हो सकता है ! इस लिए बेहतर होगा कि उसके तीन तरफ काँच या प्लास्टिक का आवरण लगा दें और सामने से खुला रखें ! अब प्रश्न्नचित्त होकर मोमबत्ती की ऊपरी लौ को बगैर पलक झपकए देखें ! शुरू-शुरू में आँखों में जलन मचेगी अतः धैर्य पूर्वक अभ्यास करें ! यथाशक्ति निविर्कर व निर्निमेष होकर देखने का प्रयाश करें ! एकदम से काफी देर तक न देखते रहे अन्यथा दुसरे दिन अभ्यास में कठिनाई महसूस होगी ! लगभग ५ से ६ महीने अभ्यास से सफलता मिलेने लगेती है ! मोमबत्ती की जगह दीपक या अगरबत्ती से अभ्यास कर सकते हैं परन्तु अँधेरे कमरे में करें !

बिना आकुलता के जब तक देख सकते हैं देखने का प्रयाश करें ! तदोपरांत आँखें बंद कर उसी लौ को देखने का प्रयाश करें ! वह लौ आपको  कुछ देर तक आँखें बंद करने पर भी दिखेगी ! यह आपका अंतःत्राटक कहलायेगा एवं एकाग्रता और दृष्टि दोनों स्थिर हो जाएँगी !

त्राटक करने की और भी कई विधियां प्रचलित हैं जैसे बिंदु, चक्र, सूर्य, चंद्र, तारे, दर्पण, नाशिका का अग्रभाग, अपने इष्टदेव की प्रतिमा, चमकता हुआ बिंदु आदि ! आजकल बना बनाया हुआ त्राटक चार्ट मिल जाता है ! इससे भी आप अभ्यास कर सकते हैं !

विशेष-

इस अभ्यास को तनावरहित होकर करें ! प्रसन्नता रखें ! यथासम्भव ब्रह्मचर्य और शाकाहारिता का ध्यान रखें ! अर्थयात जो साधक काम-विकार की तरफ ध्यान नहीं देता और शुद्ध शाकाहारी भोजन करता है उस साधक के अंदर विलक्छण शक्ति का प्रादुर्भाव होता है ! वह धीरे-धीर  भूत तथा भविष्य को भी जानने में समृथ हो जाता है ! उसके अंदर कई शक्तियां आ जाती हैं वह जीवन के सर्वोच्च शिखर पर पहुँच जाता है !

नोट- 

आँखों में जलन महसूस होने पर उन्हें मले नहीं ! उन पर ठंडे पानी के छींटे डालें या गुलाब जल का प्रयोग करें ! जिनकी आँखें कमजोर हों वे त्राटक का अभ्यास विवेकपूर्वक करें !
यह साधना उतनी सरल नहीं है जितनी कि दिखाई देती है !  इसके लिए धैर्य आत्मविश्वास और पूर्ण विवेक की आव्सय्कता होती है ! आंतरिक त्राटक के लिए आँखें बंद कर भ्रूमध्य में देखने का प्रयाश करें !

त्राटक योग लाभ-

1. दिव्य दृष्टि प्राप्त होती है !
2. सामान्य नेत्र-विकार समाप्त होते हैं !
3. जीवन की कई महत्वकांछाएं पूरी होती हैं !
4. आध्त्यमिक और सांसारिक दोनों प्रकार के सुःख मिलते हैं !
5. शारीरिक और मानशिक लाभ मिलते हैं !
6. प्रसिद्धि प्राप्त होती है !
7. कुंडलिनी जागरण के लिए यह एक सशक्क्त माध्यम है !
8. बल, ओज और तेज़ की वृद्धि होती है !
9. एकाग्रता शक्ति का विकाश होता है ! स्मरण शक्ति बढ़ती है !
10 आध्त्यमिक शक्ति का विकाश होकर इहलोक और परलोक दोनों सुधरते हैं !

  How to do trataka yoga

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You select a place which is clean and peaceful and the environment is also good. As long as you practice there, there should not be any kind of disturbance.

Sit in Sukhasana, about four feet away from the trunk. First light the candle and keep it at a reasonable distance (the candle and eyes should be coherent). If the arrival of air in the room is high then the flame of the candle will be lit, which can cause disorder in the eyes. Therefore, it would be better to put glass or plastic cover on three sides and keep it open from the front. Now question the upper flame of the candle without blinking. Initially, there will be irritation in the eyes, so practice patiently. Try to look as if you are discreet and building. Do not watch for very long otherwise you will feel difficulty in practice on the second day. Approximately 5 to 6 months of practice leads to success. You can practice with a lamp or incense sticks instead of candles, but do it in a dark room.

Try to watch as long as you can without being awkward. Afterwards, close your eyes and try to see the same flame. That flame will be visible even if you close your eyes for a while. This will be called your inlet and both concentration and vision will become stable.

There are many other methods of performing trataka such as dots, chakras, sun, lunar, stars, mirrors, the face of the Nashika, the statue of your presiding deity, the shining point, etc. Nowadays one gets ready made trataka chart. You can practice even more.

:-Special:- 

Do this exercise without stress. Be Happy. Take care of celibacy and vegetarianism as soon as possible. Meaning that a seeker who does not pay attention to work-disorder and eats pure vegetarian food, has a deformation power within that seeker. He gradually becomes rich in knowing the past and the future too. Many powers come inside him, he reaches the highest peak of life.

-:Note:-

Do not burn them if you feel burning in your eyes. Sprinkle cold water on them or use rose water. Those who have weak eyes, practice trataka judiciously.
This practice is not as simple as it appears. It requires patience, confidence and complete conscience. For the inner trunk, close your eyes and try to look in the blaze.

Benefit of Traatk yoga 

1. Divine vision is attained.
2. Common eye disorders end.
3. Many important wishes of life are fulfilled.
4. Both spiritual and earthly fragrances are found.
5. Get physical and mental benefits.
6. Fame is attained.
7. It is a powerful medium for Kundalini awakening.
8. There is an increase of force, oz and strength.
9. Concentration is a development of power. Memory increases.
10 Both the Ihloka and the hereafter are improved by the growth of spiritual power.

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