कुण्डलिनी योग, Kundalini Yoga

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हमारे प्राचीन ऋषि मुनियों ने योग विज्ञानं पर अनेक ग्रंथो की रचना की ! चूँकि वे आत्म-विज्ञान की पराकाष्ठा पर पहुँच चुके थे अतः उनका ध्यान प्राणी मात्र की तरफ उनके जीवन के उत्थान के लिए गया ! उन्होंने चैतन्यतत्व को प्राप्त करने के अनेक मार्ग बताये ! साधकों को उन मार्गों को अपनाया और वे उस लक्ष्य तक पहुंचे भी ! यह नियम है कि कोई जब साधक साधना द्वारा अपनी आत्मा का उत्थान क्र लेता है तो वह अपने के निम्न वर्ग के साधकों को यथावत वह उपाय बता देता है ताकि वह भी लक्ष्य की प्राप्ति कर सके और हुआ भी यहीं ! परम्परागत तरीके से प्राप्त आज एक से बढ़कर एक प्राच्य विज्ञानं हमारे पास हैं ! भले ही कुछ गुप्त है और कुछ प्रगट ! इन्ही में से एक है योग विज्ञान ! योग विज्ञानं की कई शाखाएँ हैं ! प्रत्येक शाखा का अपना अलग महत्व है ! प्रत्येक शाखा का विज्ञान विशुद्ध रूप से प्रयोग करने पर अंतिम बिंदु तक पहुँचता है ! इस योग विज्ञानं की एक उच्चतम शाखा भी है जिसका नाम है 'कुण्डलिनी योग' !

कुंडलिनी योग 

कुंडलिनी विज्ञानं पर भी कई विद्यानों ने विभिन्न शास्त्रों की रचना की एवं इनको इतना सरल कर दिया की वह प्रत्येक वर्ग के लोगों को आसानी से समझ में आ जाए और जिसका प्रयोगात्मक रूप से अध्ययन योग्य गुरु के निर्देश में कर वे उसका मीठा फल चख सकें !

कुंडलिनी जागरण के अनेक उपाय समय-समय पर विकसित हुए ! चाहे वे लकड़ी के छैनी से कपल में छेड़ करके शक्ति जागने की बात हो या जड़ी बूटियों के प्रयोग द्वारा ! सबसे अधिक योग विज्ञान द्वारा इसका विकाश हुआ ! योग में जो साधक क्रमशः आगे बढ़ता है वह निस्चय ही अपने ध्येय को प्राप्त कर लेता है ! यहां मुख्या रूप से हम सात चक्रों के बारे में ही बताएंगे !
1. मूलाधार चक्र 
2. स्वाधिष्ठान चक्र 
3. मणिपूरक चक्र 
4. अनाहत चक्र 
5. विशुद्धि चक्र 
6. आज्ञा चक्र 
7. सहस्त्रार चक्र

योग कुण्डलिनी उपनिषद के अनुसार-

मूलबन्ध के अभ्यास में अधोगामी अपान को बालात उर्ध्वगामी बनाया जाए ! इससे वह प्रदीप्त होकर अग्नि के साथ-साथ ही ऊपर चढ़ता है !
इसी उपनिषद में आगे लिखा है कि बुद्धिमान साधक कुण्डलिनी भूत शक्ति को संचालित करें ! मूलाधार से स्फूर्ति-तरंग उठकर भ्रूमध्य में पहुंचे और दिव्य नाद की अनुभूति करने लगे तभी कुण्डलिनी शक्ति जाग्रत संचालित समझना चाहिए !

कुण्डलिनी योग से लाभ-

1. इससे रोग प्रतिरोधक तंत्र मजबूत होता है !
2. इससे रक्त शुद्ध होता है !
3. यह तनाव और अवसाद को दुर करने में मदद करता है !
4. ये पौरूष और यौन स्वास्थ्य का विकास करता है !
5. जो लोग वजन घटना चाहते है उनके लिए भी यह फायदेमंद योग है !
6. यह मन, शरीर और आत्मा को एक रेखा में लाता है !
7. यह पैर, छाती, हाथ, पेट, कूल्हों और कंधों को टोन करने में मदद करता है !
8. कुंडलिनी योग धूम्रपान और शराब की लत को छुडाने में प्रभावशाली है !
9. कुंडलिनी के 7 चक्रों का जागरण होने से मनुष्य को शक्ति और सिद्धि का ज्ञान प्राप्त होता है !

Kundalini Yoga-

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Our ancient sage sages wrote many texts on yoga science. Since he had reached the pinnacle of self-science, his attention was shifted towards mere living for the upliftment of his life. He told many ways to achieve consciousness. Seekers adopted those paths and they reached that goal as well. It is a rule that when a seeker takes up the upliftment of his soul through cultivation, then he gives the remedy to his lower class seekers as soon as possible so that he too can achieve the goal and it happened here too. Today, we have more than one oriental science obtained in the traditional way. Even if something is secret and something is revealed. Yoga science is one of these There are many branches of yoga science. Each branch has its own importance. The science of each branch reaches the end point on purely experimentation. There is also a highest branch of this yoga science called 'Kundalini Yoga'.

Even on Kundalini science, many scholars have composed various scriptures and made them so simple that it can be easily understood by the people of every class and they can taste the sweet fruit by doing it under the instruction of an expertly studied master.

Many remedies of Kundalini awakening developed from time to time. Whether they talk about waking power by manipulating a couple with a wooden chisel or using herbs. It was developed by most of the science of yoga. In Yoga, the seeker who progresses forward, he surely attains his goal. Here we will mainly tell about the seven chakras.
1. Muladhara Chakra
2. Swadhisthana Chakra
3. Manipurka Chakra
4. Anahata Chakra
5. purification cycle
6. Command cycle
7. Sahasrar Chakra

According to the Yoga Kundalini Upanishad-

In the practice of moolabandha, the downward person should be made balat upward. With this, he is illuminated and rises up along with the fire.
It is further written in this Upanishad that intelligent seekers should conduct Kundalini ghost power. Waking up from the base of Muladhar, he reached into the earth and started feeling the divine sound, only then should the Kundalini Shakti be awakened.

Benefits of Kundalini Yoga-

1. This strengthens the immune system.
2. This purifies the blood.
3. It helps in relieving stress and depression.
4. It develops virility and sexual health.
5. It is beneficial for those who want to lose weight.
6. It brings the mind, body and soul in a line.
7. It helps tone the legs, chest, hands, abdomen, hips and shoulders.
8. Kundalini Yoga is effective in relieving smoking and alcohol addiction.
9. By awakening the 7 chakras of Kundalini, man attains knowledge of strength and accomplishment.

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