धारणा-पंच धारणा, Perception punch

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यहाँ पाँच प्रकार की धारणाओं का वर्णन किया गया है ! जिनके ध्यान करने से कषाय के परिणाम मंद होते हैं ! जैन धर्मों के ग्रंथों में ध्यान और धारणाओं का विस्तृर्त विवेचन मिलता है जिनका चिंतन करने से कर्मों का क्षय होता है और आत्मिक लाभ प्राप्त होता है !
महाऋषि घेरण्ड यहाँ कहते हैं की ये धरणायें सिद्ध होने से सभी कार्य स्वतः सम्पादित हो जाते हैं ! पाँच धरना ये हैं-
1. पार्थिव धारणा, 2. आम्भासि धारणा, 3. आग्नेयी धारणा, 4. वायवीय धारणा, 5. आकाशी धारणा

पार्थिव धारणा-

पृथ्वी तत्व का वर्ण हरताल के समान है ! इसका लं बीज चौकोर आकर और देवता ब्रम्ह है ! साधक योग साधना द्वारा इसे प्रकट क्र हृदय में धारणा करे ! पाँच घड़ी (२ घंटे) प्राण को आकर्षित क्र कुम्भक करें ! यह पार्थिव धारणा या आधो-धारणा मुद्रा कहलाती है ! इसकी पूर्ण सिद्धि होने पर साधक पृथ्वी विजय क्र लेता है ! निरंतर इस धारणा को करने वाला साधक मृत्युंजय और सिद्ध होकर धरती पर गमनागम करता है !

आम्भासि धारणा-

जल तत्व का रंग शंख और चन्द्रमा की तरह उज्ज्वल एवं कुंड के फूल की तरह शुभ्र होता है तथा इसकी संज्ञा अमृत है ! बीज वकार वं और विष्णु इसके देवता हैं ! योग के प्रभाव से हृदय के बीच उक्त जल तत्व समुदाय का ध्यान करें और उसी समय प्राण वायु को खींचकर पाँच घड़ी चित्त को स्थिर रखते हुए कुम्भक करें ! यह आम्भासि धारणा है ! यह मुद्रा बड़े-बड़े दुःखों, ताप और पापों का नाश करता है ! जो साधक यह धारणा करता है वह योगियों का शिरोमणि कहलाता है वह भयंकर व गंभीर जल में भी श्वाश साधना के कारण नहीं डूबता है !

आग्नेयी धारणा-

अग्नि तत्व का स्थान नाभि स्थल है ! इसका रंग इंद्रगोप (बीर बहुटी) की तरह लाल है ! बीज मंत्र रं है ! इसका आकर त्रिकोण और देवता रूद्र हैं ! यह तत्व तेज़ का समूह है, दीप्तमान है, प्रकाशवान है और सिद्धियों को देने वाला है ! इसे योग बल से उदय करके ध्यानस्थ होकर पाँच घड़ी तक (२ घण्टा) कुम्भक द्वारा प्राणवायु को धारणा करें ! इसका नाम आग्नेय धारणा मुद्रा है ! इसके नित्य अभ्यास से संसार का भी दूर होकर साधक विजय होता है ! यदि अचानक व्यक्ति अग्नि में गिर जाए तो भी अग्नि जला नहीं सकती और वह सुरक्षित बच जाता है !

वायवीय धारणा-

वायु तत्व का रंग घिसे हुए अंजन (सुर्मा) या धुएं के रंग के समान हल्का-मटमैला होता है ! बीजमंत्र यं आकर है और ईस्वर इसके देवता हैं ! यह तत्व सत्वगुण माय है ! योग बल के प्रभाव से वायु तत्व को उदय करके एकाग्रचित्त हो प्राणवायु को खींचकर कुम्भक प्राणायाम के द्वारा पांच घड़ी तक धारणा करें ! इसका नाम वायवीय मुद्रा है (वायु धारणा) ! इसके अभ्यास से वायु द्वारा कभी मृत्यु नहीं होती और साधक को आकाश गमन करने का सामर्थ्य प्राप्त हो जाता है ! बुढ़ापा और मृत्यु का नाश करता है ! यह विधि मूर्ख नाश्तिक या वह व्यक्ति जिसके भीतर भक्ति भाव नहीं होते जो शठ है ऐसे व्यक्ति को कभी न बतायें !
ऐसा करने से सिद्धि प्राप्त नहीं होती है !
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आकाशी धारणा-

आकाश तत्व का रंग समुद्र के विशुद्ध जल (नील वर्ण) की तरह प्रकाशित हैं ! इसके देवता सदाशिव हैं और बीजमन्त्र हकार हैं ! इसी आकाश तत्व को सदाशिव सहित योग बल द्वारा उचित क्र ध्यानास्थ होकर धारणा करें और उस समय प्राणवायु को आकर्षित करता हुआ साधक कुम्भक द्वारा पाँच घड़ी धारणा करें ! इसी को आकाश मुद्रा कहते हैं ! यह मुद्रा करने से मोक्ष होता है जो साधक आकाशी धारणा जानता है, अभ्यास करता है, वह योगी है ! उसकी मृत्यु किसी से नहीं होती ! प्रलय होने पर भी वह ज्यों का त्यों बना रहता है !

      Perception punch

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Here five types of perceptions are described. Whose meditation slows down the results of suffering. In the texts of Jain religions, there is a detailed explanation of meditation and perceptions, whose contemplation causes loss of karma and spiritual gain.
The great sage gheand says here that all the works are done automatically after these dharnas are proved! The five pickets are
1. Earth perception, 2. Ambient perception, 3. Igneous perception, 4. Pneumatic perception, 5. Astrological perception

Earth perception-

The color of the earth element is similar to that of strike. Its seed is square and the deity is Brahma. Sadhak should practice it in the manifested heart by practicing yoga. Five hours (2 hours) to attract life, do Kumbhak. This is called earthly perception or half-perception currency. Upon its complete attainment, the seeker conquers the Earth. The seeker who continuously performs this belief, proves to be deathly and perfect, and travels to the earth.

Aambhashi Dharna-

The color of the water element is bright like a conch and the moon and auspicious like a flower of a furrow and its noun is nectar. Seed Vakar Vam and Vishnu are its deities. With the effect of yoga, meditate on the said water element community in the heart and at the same time pull the vital air and do five steps for Kumbhak while keeping the mind stable! This is a positive perception. This mudra destroys great sorrows, heat and sins. The seeker who makes this assumption is called the Shiromani of the yogis, he does not drown even in severe and severe water due to the breathing practice.

Igneous perception-

The place of the fire element is the navel site. Its color is red like Indragop (Bir Bahuti). The seed mantra is colorless. Its shape is the triangle and the deity Rudra. This element is a group of sharp, brilliant, bright and giving the attainments. After rising with yoga force, meditate and meditate for five hours (2 hours) by Kumbhak. Its name is Igne dharna mudra. With its continual practice, the seeker triumphs over the world too. Even if a person suddenly falls into the fire, the fire cannot burn and he is saved safely.

Pneumatic perception-

The color of the air element is light and muddy like that of a worn Anjan (Surma) or smoke color. Bijamantra is here and God is its god. This element is virtuous. With the effect of the force of yoga, the air element should be concentrated by rising and pulling the breath of life and perform the Kumbhak Pranayama for five hours. Its name is Pneumatic Mudra (air perception). By its practice, there is never death by air and the seeker gets the ability to move the sky. Destroys old age and death. Never tell such a foolish snack this method or a person who does not have devotion in his heart, which is a shakha.
Doing so does not achieve success.

Akashi dharna-

The color of the sky element is illuminated like the pure water of the sea (indigo). Its gods are Sadashiva and Bijamantra hakaar. Think of this sky element with the help of yoga force, with the help of Sadashiva, with proper meditation and at that time, the seeker, while attracting Pranavayu, should think five times by Kumbhak. This is called sky money. By doing this mudra, salvation is attained by the seeker who knows, practices, and is a yogi. He does not die for anyone. Even after the Holocaust, it remains as it is.

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