योगासनों से लाभ के वैज्ञानिक कारण (Scientific reasons to benefit from yoga)

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वायु निरोधक एवं शक्तिबंध की क्रियाओं से लाभ- सुबह के समय शरीर में कड़ापन होता है ! उच्च अभ्यास के लिए शरीर एकदम से तैयार नहीं रहता ! अतः हल्के व्यायाम करने से अंगो- उपांगों में लोच, लचीलापन आ जाता है हल्के व्यायाम से हमारे संधि संस्थान व पूरे शरीर के जोड़ खुल जाते हैं ! रक्त संचार पर्याप्त मात्रा में होने लगता है और आगे के योगासनों में समस्या नहीं होती !
पूरे शरीर में तीव्रता आ जाती है ! शरीर हल्का हो जाता है !शरीर में स्फूर्ति आ जाती है संधि जोड़ खुल जाने के कारण उनमें फंसी हुई वायु रक्त संचार की तीव्रता के कारण वहाँ से निकल जाती है ! पूरे शरीर को एक प्रकार कि नई ताज़गी, चेतनता प्राप्त होती है ! मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह तीव्र होने से उसे क्रियाशील बनता है ! इस प्रकार हमारे पैर के अँगूठे से लेकर टखना, पिंडली, घुटना, जंघा, नितम्ब, उपस्थ, कमर, उदर, पीठ, मेरुदंड, फेफड़े, हाथ की अंगुलियाँ,  कुहनी, स्कंध, ग्रीवा, आँख, सिर, पाचनतंत्र के अंग आदि सभी भाग क्रियाशील हो जाते हैं और उनके विकार दूर होकर हमे निरोगी काया प्रदान करते हैं !

पदमासन एवं ध्यान से संबंधित आसनों से लाभ - 

पदमासन एवं इनसे संबंधित आसनों को करने से हमारे कुण्डलिनी चक्र की ऊर्जा ऊर्ध्वमुखी होती है अतः मूसाधार से लेकर सहस्त्र धार चक्र की ऊर्जा को हम आत्मसात कर होने वाले सभी लाभ प्राप्त कर सकते हैं !जीवन में नई चेतना का प्रादुर्भाव होता है इस अभ्यास में बैठकर ध्यान करने से हम आत्मसाक्छात्कार प्राप्त कर सकते हैं ! पद्मासन में बैठने से हमारा मेरुदंड स्थिरता को प्राप्त करता है, अतः बुढ़ापे में झुकने की आवश्य्कता नहीं होती ! पद्मासन में बैठने से ध्यान और धारणाओं के द्वारा हम अपनी स्मरण शक्ति को तेज़ कर सकते हैं !

वज्रासन से संबंधित आसनों से लाभ-

जब हम वज्रासन में बैठते हैं, तो यह हमारे श्रेणी प्रदेश प्रजनन अंग और पाचनतंत्र के अंगो में रक्त संचार को सुचारु कर उन्हें सुदृण बनाता है ! प्रजनन अंग के कई अन्य रोगों को लाभ प्रदान करता है ! जैसे हर्निया, शिथिलता, शुक्राणु का न बनना, बवासीर, अण्डकोष, ग्रंथि की वृद्धि हाइड्रोसील आदि एवं महिलाओं के मानसिक स्त्राव की गड़बड़ी को दूर करता है ! 

खड़े होकर किये जाने वालो आसनों से लाभ- 

इस प्रकार के आसनों से पिंडली एवं जंघाओं के मांशपेशियों में मजबूती आती है जिस कारण उनमे होने वाले रोग जैसे- गठियाँ, कम्पवात, पिंडलियों का दर्द, घुटने की समस्या आदि रोगों से छुटकारा मिल जाता है ! खड़े होकर करने वाले आसनों से पीठ की पेशियों में भी खिंचाव आ जाता है, जिससे वे व्यवस्थित होती हैं !

पीछे की ओर झुककर किये जाने वाले आसनों से लाभ- 

पीछे की ओर झुककर किये जाने वाले आसनों से हमारे फेफड़े फुफ्फुस फैलते हैं, जिस कारण वे ऑक्सीजन की अधिक मात्रा संग्रहित कर हमारे शरीर को नवयौवनता प्रदान करते हैं ! पीछे झुकने से उदर प्रदेश की पेशियाँ तनती हैं, जिस कारण पाचनतंत्र पुस्ट होता, क्योकि रक्तादि पर्याप्त मात्रा में पहुँचता है और उनके अंगो की अच्छी मालिश भी हो जाती है 
पीछे झुकने से हमारे मेरुदंड की तंत्रिकाएं पुष्ट होती हैं ! पूरा शरीर इनसे जुड़ा हुआ होता है ! अतः उनके संतुलन को ठीक कर उनसे होने वाली बीमारियां जैसे- स्लिप- डिस्क, साइटिका स्पांडिलाइटिस एवं मेरुदंड के कई रोग आदि ठीक करता है !

आगे झुककर किये जाने वाले आसनों से लाभ- 

इस प्रकार के आसन से उदर प्रदेश में संकुचन होता है, जिस कारण उसमे अधिक दबाव पड़ता है ! पीठ की कशेरुकाएं फैलती हैं और मांशपेशियां उदीप्त होती हैं ! मेरुदंड की ओर रक्त संचार पर्याप्त मात्रा में होता है ! जिससे वह अपने काम को सुव्यवस्थित से करता है उदर प्रदेश में दबाव और संकुचन पड़ने के कारण उदर प्रदेश के अंगो की अच्छी मालिश हो जाती है ! जिस कारण पाचनतंत्र के रोग नष्ट होते हैं, व गुर्दा, यकृत, अग्नाशय आदि अंग मजबूत होकर निरोग रहते हैं !

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"Scientific reasons to benefit from yoga"

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Benefits from anti-air and potency activities - There is stiffness in the body in the morning. The body is not ready for high exercise. Therefore, by doing light exercise, the elasticity of the limbs and appendages comes, with light exercise, our joints and whole body joints are opened. Blood circulation starts in sufficient quantity and there is no problem in further yoga.
The whole body intensifies. Body gets lighter.
There is excitement in the body due to the opening of the joint, the air trapped in it gets out from there due to the intensity of blood circulation. The whole body receives a new kind of freshness, consciousness! Due to the rapid flow of blood in the brain, it becomes functional! Thus all parts of our toe from ankle, calf, knee, thigh, buttock, hip, waist, abdomen, back, spine, lungs, hand fingers, elbow, wrist, cervix, eye, head, digestive system etc. Become active. And by removing their vices, we provide healthy body.

Benefits of rugs related to Padmasana and meditation-

By doing Padmasana and related postures, the energy of our Kundalini Chakra is upward, so we can get all the benefits of imbibing the energy of the Mausadhara to the Sahasra Dhar Chakra! A new consciousness in life is born. By meditating, we can achieve self-realization! By sitting in Padmasana, our spine achieves stability, so there is no need to bow down in old age! By sitting in Padmasana we can speed up our memory by meditation and perceptions.

Benefits of rugs related to Vajrasana-

When we sit in Vajrasana, it smoothes the blood circulation in the organs of the reproductive organs and digestive system of our category, making them strong. Provides benefits to many other diseases of the reproductive organ. Such as hernia, dysfunction, loss of sperm, hemorrhoids, testicles, growth of gland, hydroseal etc. and removes disturbances of mental secretions of women.

Benefits of standing rugs-

This type of rugs strengthen the muscles of the calf and thighs, due to which diseases such as nectar, gonorrhea, calf pain, knee problem etc. are relieved. Standing postures also stretch the muscles of the back, due to which they are arranged.

Benefits of back-bending rugs-

Back-bending rugs spread lungs to our lungs, due to which they store more amount of oxygen and give newness to our body! By leaning back, the muscles of the abdominal region are stretched, due to which the digestive system is pusted, because the blood reaches in sufficient quantity and their organs are well massaged.
Leaning back reinforces the nerves of our spinal cord! The whole body is attached to them. Therefore, by correcting their balance, diseases caused by them like- slip-disc, sciatica spondylitis and many diseases of spinal cord etc. are cured.

Benefit from bending rugs-

This type of posture causes contraction in the abdominal area, due to which there is more pressure in it. The vertebrae of the back protrude and the muscles are incised. There is a sufficient amount of blood circulation to the spinal cord! Due to which he does his work in a systematic manner, due to pressure and contraction in the abdominal area, the abdominal organs get a good massage! Due to which diseases of the digestive system are destroyed, and organs like kidney, liver, pancreas etc. remain strong and healthy.


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