हस्तमुद्रा योग क्या है- What is Hastmudra Yoga

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हमारा शरीर अनंत रहस्यों का भंडार है ! अभी जो हमे विद्याएं ज्ञात हैं वे उन कैवल्य ज्ञानी परमात्माओं द्वारा प्रदत्त ज्ञान का एक प्रतिशत भी नहीं हैं ! यदि हमे उनकी एक प्रतिशत का कुछ भाग ज्ञात हो जाए तो हम ज्ञान पद से चूर हो जाते हैं और कई बार हमे ज्ञान का अपच हो जाता है ! इन्ही आपको को दूर करने के लिए हमे पौराणिक काल से महाऋषियों ने कई सिद्धांत प्रदिपादित किये कई प्रकार की वैज्ञानिक कलाएं सिखाईं ! वे प्राचीन वैज्ञानिक कलाएं आज कई रूप में विद्यमान हैं ! उन्ही में से एक है- हस्तमुद्रा विज्ञान
 हम इन मुद्राओं के द्वारा शरीर से बाहर जाने वाली शक्तियों को अपने अंदर वापस आत्मसात कर उन्हें एकत्रित क्र उसका बहुआयामी लाभ उठा सकते हैं ! वैसे भी हमारा शरीर प्रकृति के पाँच तत्वों से मिलकर बना है ! कदाचित कोई तत्व कम या ज्यादा होता है तो हमारा शरीर कई रोगों से ग्रसित हो जाता है ! उन्ही तत्वों को नियंत्रित करने के लिए हस्त-मुद्राओं का उपयोग करना सिख्या जाता रहा है ! इनके अल्वा हमारे शरीर में प्रतीत होने वाली कई अनजान घटनाओं को भी इन्ही हस्तमुद्राओं का आवलंबन लेकर हम शारीरिक मानशिक तथा सूकस्चम शक्तियों का लाभ उठाकर आत्मउत्थान क्र सकते हैं 

हमारे शरीर में हमारे हाथ की पाँचो अंगुलियां हमे पाँच तत्वों की तरफ इंगित करती हैं ! अंगूठा- अग्नि तत्व को, तर्जनी अंगुली- वायु तत्व को, मध्यमा (बीच की अंगुली)- आकाश तत्व को, अनामिका- पृथ्वी तत्व को और कनिश्ठा- जल तत्व को इंगित करती है, जैसा की आप ऊपर चित्र में देख सकते हैं ! इन पाँचो अंगुलियों से हमारे शरीरमे आयी किसी प्रकृतिस्थ विकृति को मुद्राओं के द्वारा इन तत्वों को सम कर हम स्वस्थ्य को प्राप्त कर सकते है !

किसी भी अंगुली के अग्र भाग को यदि अंगूठे से मिलाते हैं तो उस अंगुली से संबंधित तत्व में आधी विकृति सम हो जाती है ! यदि अंगूठे को किसी भी अंगुली के मूल भाग से मिला दें तो उस अंगुली से संबंधित तत्व बढ़ने लगते हैं ! यदि किसी अंगुली के अगर भाग को अंगुष्ठ के प्रथम पोर की गद्दी से दबाते हैं तो उससे संबंधित तत्व घटने लगते हैं ! इस प्रकार हम कई बीमारियों को, चाहे वो शारीरिक हो या मानसिक, इन मुद्राओं का प्रयोग करके अहिंसात्मक लाभ उठा सकते हैं

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"हस्तमुद्राएँ साधक के भीतर की नकारत्मकता को दूर कर सकरात्मकता का प्रवेश करती हैं"


          What is Hastmudra Yoga

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Our body is a storehouse of endless mysteries. The knowledge we know right now is not even a percentage of the knowledge imparted by those Kaivalya Gyan Gods. If we get to know some part of their one percent, then we get lost in the rank of knowledge and many times we get indigestion of knowledge. To overcome these, we have been taught many types of scientific arts since ancient times by the great sages who have given many principles. Those ancient scientific arts exist in many forms today. One of them is palm science! We can assimilate the forces going out of the body through these postures back into us and collect them and take advantage of its multifaceted benefits. Anyway, our body is made up of five elements of nature. Perhaps there is more or less an element, then our body suffers from many diseases. It has been taught to use hand postures to control those elements. Apart from these, many unknown events that seem to occur in our body, we can do self-uplift by taking advantage of physical mental and psychological powers by taking the help of these handmade mudras.

The five fingers of our hands in our body point us to the five elements. The thumb indicates the fire element, the index finger - the air element, the middle element (middle finger) - the sky element, the ring finger - the earth element and the kanistha - the water element, as you can see in the picture above! With these five fingers, we can achieve health by combining these elements with the postures of any natural deformity in our body.

If you join the front part of any finger with the thumb, then the element related to that finger becomes half the deformity. If the thumb joins the root part of any finger, then the elements related to that finger start growing. If the part of a finger is pressed with the pad of the first tip of the thumb, then its related elements start to decrease.
In this way we can avail non-violent benefits to many diseases, whether physical or mental, by using these postures.

"Hastamudras enter the negativity by removing the negativity within the seeker."

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