हठ योग क्या है- What is hatha yoga

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एक मात्र भारत ही ऐसा देश है जहाँ ऋषि-मुनियों ने आत्म तत्व की प्राप्ति के लिए अनेक प्रकार की विधियां बताई हैं ! व्यक्ति अपने-अपने कर्मानुसार जन्म लेता है व मृत्यु को प्राप्त करता है ! यही कारण है की उसी कर्म के अधीन मनुस्य के भाव एवं विचारों में भिन्नता होती है ! योगाचर्यों को यह दर्शन पूर्व से ही ज्ञात था ! उनका मानना था यदि हम व्यक्ति को शिवात्मा का एक ही मार्ग बताएंगे तो शायद सभी को एक साथ समझ में नहीं आएगा ! क्योकि एक तो विचार नहीं मिलेंगे और दूसरा मनुस्य की शारीरिक अवस्थाएं भी अलग-अलग होती हैं ! दुनिया का कोई काम करना हो तो उसके लिए सबसे ज्यादा जरुरी है 'अच्छा-स्वास्थ्य !" इस समंध में एक कहावत भी प्रचलित है, पहला सुख निरोगी काया ! यह पंक्ति बहुत सोच समझकर लिखी गई है ! यही कारण है कि उन पर परम् आत्माओं ने हमे योग दर्शन दिया जिससे हम शरीक रूप से स्वस्थ्य बनें और व्ही क्रियात्मक अभ्यास हमारे जीवन को सुंदर बनाने में सहयोग करे ! अतः हम उस निजात तत्व का दर्शन करें जिससे हमारा जन्म-मरण चक्र समाप्त हो जाय और हम कैवल्य को प्राप्त कर सकें !

इसी क्रम को उन्होंने यथावत रखते हुए हमे योग की कई कलाएं सिखाईं ! उसी कला में से एक कला का नाम है-
 मलशोधन षट्कर्म ! ! महर्षि घेरण्ड लिखते हैं कि-

षट्कर्मणा शोधनं च आसनेन भवेद्डूडं !

मुद्रया स्थिरता चैव प्रत्यहारेण धीरता !!

प्राणायामाललघ्वं च ध्यानात्प्रतयचमात्मनः !

समाधिना निर्लिप्तं च मुक्तिरेव न संशयः !!

अर्थ : 

षट्कर्मों से शरीर की शुद्धि होती है ! आसनों से शरीर में दृणता आती है ! मुद्राओं में स्थिरता आती है और प्रत्याहार से धीरता बढ़ती है ! प्राणायाम से शरीर में स्फूर्ति और हल्का पन आता है ! ध्यान द्वारा आत्मा प्रत्यछ होती है तथा निर्विकल्प समाधि के द्वारा बिना संशय के मुक्ति होती है !

हठ योग में षट्कर्म के बारे में लिखा है कि:-

मेदः श्लेष्माधिकः पूर्व षट्कर्माणि समाचरेत !

अन्यस्तु नाचरेत्तानि दोषाणां संभवतः !!

धौतिर्वस्तिस्तथा नेतिस्त्राटाकम नौलिकम तथा !

कपाल्भातिश्चैतानी षट कर्माणि पृच्छते !!

क्रमशतकमिदं गोप्यं घट्शोधनकाक्म !

विचित्रगुण संधायि पूजयते योगीपुंगवैः !!

अर्थ : 

आचार्य कहते है कि जिस पुरुष में मेड और श्लेष्मा आदि की अधिकतम हो उसे पहले षट्कर्म करना चाहिए ! अर्थयात जिनको कफ़ की अधिकता, हो जुकाम हो, (नाक मुँह से कफ निकलता हो) स्थूलता आदि से पीड़ित हो उन्हें शरीर शुद्धि हेतु मलशोधन षट्कर्म करने चाहिए ! लेकिन जिनमें स्थूलता, श्लेष्मा आदि न हो उन्हें षट्कर्म की आवश्य्कता नहीं होती है ! मलशोधन मलशोधन ष्कर्मो के नाम निम्नलिखत हैं ! 

१. धौति २. वस्ति ३. नेति ४. त्राटक ५. नौलि ६. कपल- भांति 

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विद्वान आचार्यों ने ये सहकर्म योग मार्ग में बताये हैं ! ये षट्कर्म गोपनीय तथा शरीर को शुद्ध करने वाले और विचित्र गुणों को उपजाने वाले हैं ! योगीजन इनकी प्रशंसा करते हुए कहते हैं यदि ये गुप्त न रखे जाएँ तो अन्य लोग भी इसको करेंगे जिससे योगीजनों की पूज्य्ता न रह सकेगी ! योगियों को उत्कृष्ठ बनाना ही षट्कर्म का उद्देश्य है !

What is hatha yoga


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India is the only country where sages and sages have prescribed many methods for the attainment of Atman. A person takes birth according to his own order and attains death! This is the reason that under the same karma there is a difference in the thoughts and thoughts of a human being. This philosophy was already known to the Yogacharyas! He believed that if we tell a person the same path of Shivatma, then perhaps not everyone will understand together! Because one will not get ideas and second the physical states of manus are also different! If you want to do any work of the world, it is most important for him, "Good health!" There is also a saying in this regard, the first happiness is the body! This line is written very thoughtfully! This is the reason why the souls are placed on them. He gave us the philosophy of yoga so that we can become healthily and whereever practice helps to make our life beautiful! And should come to an end and we can achieve Kaivalya!

Keeping the same order, he taught us many arts of yoga! One of the same art is named Malsodhan Shatkarma!
Maharishi Gherand writes that-
Hekkamrna Shodhanak Asanen Bhaveddund!
Mudraya Sustainability Chave Pratiharen Dheereta !!
Pranayamaalalghvana dhyanatpratayacmatman:
Samadhina Nirlept M Ch Muktarev na Sambhaya !!

Meaning: The body is purified by hetkarma. Asanas provide vision in the body. Stagnation in postures and withdrawal increases patience. Pranayama brings lightness and lightness to the body. The soul is satisfied through meditation and through nirvikalpa samadhi is liberated without doubt.

In Hatha Yoga, it is written about hetkarma: -
Meda: Mucinous: Formerly hexagonal conglomerate!
Elsewhere Nachretattani Doshanam Possibly !!
Dhautirvastistatha Netistratakam Naulikam and!
Kapalbhatischaitani Shut Karani Pagriti !!
Respectively Gopayam Ghatshodhanakam!
Vichitaguna Sandhyayi Pujayate Yogipungwaiah !!

Meaning: Acharya says that a man who has the maximum of meds and mucus, etc., should do Shatkarma first. Meaning, those who are suffering from excess phlegm, colds, (phlegm coming out of the nose and mouth), etc., should perform Malshodhan shakram for body purification! But those who do not have grossness, mucus etc., do not need hexam! Following are the names of Mashodhan Sharma.
1. Dhouti 2. Item 3. Neti 4. Trataka 5. Nauli 4. Couple-like
The scholar Acharyas have told these co-workers in the yoga path. These hetkrams are secretive and purifying the body and cultivating bizarre qualities. The yogis praise them and say that if they are not kept secret, then other people will also do them so that the worship of the yogis will not remain. The aim of Shatkarma is to make Yogis excellent.


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