नाभि क्यों हटती है, Why does the navel go away

https://www.yogadeyy.com/2020/01/why-does-navel-go-away

हमारे सम्पूर्ण शरीर का केंद्र स्थान है नाभि, ये मानव को स्वस्थ्य प्रदान करने में मुख्य योगदान प्रदान करता है !
आयुर्वेदाचार्यों के मतानुसार नाभि चक्र यदि अपने केंद्र स्थान से हट जाए (सरक जाए या पलट जाए) तो कई प्रकार के रोगों को पैदा कर सकता है ! नाभि चक्र के अपने स्थान से खिसक जाने पर उदर-प्रदेश में अवस्थित मणिपूरक चक्र के सभी अंग कई प्रकार की व्याधियों से पीड़ित हो जाते हैं ! अतः सम्पूर्ण शरीर को पूर्ण तंदरुस्त रखने के लिए नाभि का अपने स्थान पर होना अति आवश्य्क है !

नाभि कैसे हट जाती है-

कई लोग हमेशा नाभि चक्र का टहलना या हटने को लेकर परेशान रहते हैं या कई लोगों को मालूम ही नहीं रहता कि
नाभि चक्र अव्यवस्थित है और वे पूरी उम्र उनसे होने वाले रोगों को लेकर चिंतित रहते हैं ! नाभि के हटने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे अचानक किसी वजनदार वस्तु को उठाना,पैरों की चलते समय स्थित बिगड़ जाना उछलना-कूदना, भागना, सोते समय से अचानक सीधा उठ जाना, एक हाथ से अधिक वजन उठाना, मल-मूत्र के वेगों को रोकना, उदर-प्रदेश को बगैर जानकारी के बल पूर्वक मलने से, उदर की किसी पुराणी बीमारी के कारण, भूँक-प्यास को रोकना,सोने और उठने के क्रम में अनिस्चतिता, मानसिक विकार जैसे भय, अधिक चिंता क्रोध की अधिकता ! अशुद्ध भोजन या वायु उतपन्न करने वाला भोजन करने से, आहार की अधिकता, छींक या जम्हाई को रोकना, अपान वायु को रोकने से, निकलना ठीक ढंग से योग की क्रियाओं को न करना आदि अनेक कारणों से नाभि अपने स्थान से हट जाती है !

नाभि हट जाने से उत्तपन्न होने वाले रोग-

यदि नाभि-स्पंदन अपने स्थान से हट जाए तो कई प्रकार के रोग दृष्टिगोचर होने लगते हैं ! कब्ज हो जाता है, मल रुक जाता है, या बहुत कम मल त्याग होता है, या बार-बार मल कम मात्रा में निकलता है, आँतों में मल चिपक जाता है जिस कारण वायु विकार के संभावना अधिक बनी रहती है ! नेत्र विकार, बालों का झड़ना या असमय सफेद होना, दुबलापन, वीर्य विकार, मुँह में बदबू, आना रक्त, विकार या ह्रदय विकार आदि !

नाभि ठीक करने वाले आसन-

नाभि चक्र ठीक करने के लिए निम्नलिखत आसन अधिक उपयोगी व लाभकारी मने जाते हैं जैसे- सुप्तवज्रासन, पश्चिमोत्तासन, उष्ट्रासन, चक्रासन, धनुरासन, नौकासन, हलासन, उत्तानपादासन आदि !

Why does the navel go away

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The navel is the center place of our entire body, it provides the main contribution in providing health to the human being.
According to the opinion of Ayurveda, if the navel chakra is removed from its center (move or turn) it can cause many diseases. When the navel chakra slips from its place, all the organs of the Manipuraka Chakra located in the abdominal region suffer from a variety of diseases. Therefore, to keep the entire body fully healthy, it is very important for the navel to be in its place.

How the navel is removed-

Many people are always worried about walking or moving the navel chakra or many people do not know that the navel chakra is disorganized and they are worried about diseases due to them throughout their life. There can be many reasons for the removal of the navel, such as sudden lifting of a weighty object, worsening of the legs while running, jumping, running, sudden straightening from bedtime, lifting more than one hand, stools and urine. Stopping velocities, rubbing the abdominal area without knowing it, due to an old stomach disease, stopping the thirst, indigestion in sleeping and getting up, mental disorders like fear, excess anxiety A plurality of available. By eating unclean food or air-producing food, excessive diet, stopping sneezing or yawning, stopping the air, leaving the navel and not doing yoga activities properly, the navel is removed from its place due to many reasons.

Diseases arising due to removal of the navel-

If the umbilical cord is removed from its place, then many types of diseases start to become visible. Constipation occurs, stool stops, or very little bowel movement, or frequent stools come out in small amounts, stools stick in the intestines, due to which the chances of air disorder remain high. Eye disorders, hair loss or premature whitening, leanness, semen disorder, bad mouth, blood, disorders or heart disorders etc.

Navel-fixing asanas-

The following asanas are considered more useful and beneficial for healing the navel chakra, such as Suptavajrasana, Paschimottasana, Utsrasana, Chakrasana, Dhanurasana, Naukasana, Halasana, Uttanapadaasana etc.

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