सर्वांगासन कैसे करें, How to do Sarvangasana

https://www.yogadeyy.com/2020/02/how-to-do-sarvangasana

सर्वांगासन में सर्व का अर्थ पूरा, पूर्ण या सभी और अंग का अर्थ शरीर का भाग है चूँकि इस आसन में सभी अंग से योग क्रियाएं हो जाती हैं और पूरा शरीर लाभान्वित होता है इसलिए इस आसन का नाम सर्वांगासन है ! वैसे इस आसन को शीर्षासन के पश्चात सबसे महत्वपूर्ण मन गया है ! इस आसन को आसनों का महाराजा भी कहा गया है !

सर्वांगासन कैसे करें-

पीठ के बल लेट जाएं ! दोनों हाथ जमीन पर कमर के अगल बगल में रखें ! घुटनों को कड़ा रखते हुए धीरे-धीरे दोनों पैरों को ऊपर की ओर इतना उठाये कि कमर और पैर समकोण बना लें अब अपनी हथेलियों को कमर पर लगाएं और धीरे-धीरे कमर को हाथों के सहारे इतना उठाये कि आपकी ठुड्डी आपके सीने को छूने लगे ! आपने अभी हाथों का अवलंबन लिया है अतः यह सालंब सर्वांगासन कहलायेगा ! अभ्यास हो जाने के बाद हाथों का अवलंबन हटा लें ! वह सर्वांगासन इस आसन को प्रतिदिन करने से आशातीत लाभ होता है !

सर्वांगासन करने का समय-

आसन करते समय और वापस आते समय अन्तःकुम्भक करें एवं पूर्ण आसन पर स्वाभाविक श्वाश चलने दें ! आधा से पाँच मिनट तक क्र सकते हैं ! अभ्यास हो जाने पर समय बढ़ाएं !

सर्वांगासन से लाभ-

1. आसन करने पर रक्त की मात्रा बढ़ जाने से ग्रंथि की कार्य छमता बढ़ जाती है, जिससे स्वस्थ्य पर अच्छा प्रभाव पड़ता है !
2. जिनकी बुद्धि हमेश भर्मित रहती है, काम करने में मन नहीं लगता उनको यह आसन लगभग छह महीने तक कम से कम तीन से पांच मिनट तक अवस्य करना चाहिए !
3. मिर्गी रोग कमजोर मस्तिष्क वालों के लिए यह आसन अत्यंत लाभकारी है !
4. स्त्रियां क्रमशः इस अभ्यास को कर कई रोगों छुकारा प् सकती हैं !
5. वायु गोला तल जाने पर इस आसन को एक ही समय में चार से छह बार अवस्य करना चाहिए ! यह आसन पूर्णयौवन देता है !
6. शीर्षासन से मिलने वाले लाभ भी इस आसन से मिल जाते हैं !
7. इस आसन को नियमित करने से सम्पूर्ण शरीर स्वच्छ रहता है !

सर्वांगासन करते समय सावधानियां- 

1. उच्च रक्त्चाप हृदय संबंधी बीमारी वाले साधन किसी योग्य गुरु के निर्देशन में करें !

सर्वांगासन में विशेष-

पदम् सर्वांगासन लगाने के लिए सर्वांगासन के अंतिम स्थित में पहुंचकर पद्मासन लगाएं या पहले पद्मासन लगाएं फिर सर्वांगासन की स्थित में पहुंच जाएँ तो वह पदम् सर्वांगासन कहलायेगा ! एक पद सर्वांगासन के लिए एक पैर को कमर मोड़कर सामने सिर की तरफ जमीन में स्पर्श कराएं !

How to do Sarvangasana-

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In Sarvangasana, the meaning of all is complete, complete or all and the organ means part of the body, because in this asana, all the organs perform yoga actions and the whole body benefits, hence the name of this asana is Sarvangasana. By the way, this asana has been considered the most important after headship. This posture has also been called the Maharaja of Asanas.

How to do Sarvangasana-

Lie on your back. Place both hands on the ground next to the waist. Keeping the knees tight, slowly raise both legs upwards so that the waist and legs form a right angle. Now apply your palms to the waist and slowly raise the waist with the help of hands so that your chin starts touching your chest. You have just taken up your hands, so this year will be called Sarvangasana. After practice, remove the recumbency of hands. Doing all this asanasana daily helps in hopeless life.

Time to do Sarvangasana-

While doing the asana and while coming back, do the intramuscular and let the natural breath go on the full posture. Can be cured for half to five minutes! Increase time when you are exercising.

Benefit from Sarvangasana-

1. Increasing blood volume on posture increases glandular function, which has a good effect on health.
2. Those whose intellect is always devoid of mind, they do not mind working, they should do this posture for at least three to five minutes for about six months.
3. This posture is very beneficial for people with epilepsy and weak brain.
4. Women can get rid of many diseases by doing this practice respectively.
5. When the air ball goes out, this asana should be done four to six times at the same time. This posture gives perfection.
6. The benefits of headstand can also be obtained from this asana.
7. By regularizing this asana, the entire body remains clean.

Precautions while performing Sarvangasana-

1. Do the instruments with high blood pressure heart disease under the guidance of a qualified teacher.

Special in Srwangasna-

To apply special Padma Sarvangasan, apply Padmasana to reach the last position of Sarvangasan or apply Padmasana first and then reach the position of Sarvangasan, then it will be called Padam Sarvangasana. For one post Sarvangasan, bend one leg and touch the ground towards the front head.

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