कपालभाति प्राणायाम | Kapalbhati Pranayama | - yogadeyy

 

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कपालभाति प्राणायाम एक प्रकार का श्वास व्यायाम है जो आपको विभिन्न बीमारियों से छुटकारा पाने मे मदद करता है !
बेशक ऋषि पतंजलि के योग सूत्र से हम इसे जानते है, लेकिन रामदेव स्वामीजी के कारण से इसकी लोकप्रियता से बढ़ गई है ! कपालभाति योग प्राणायाम रामदेव स्वामीजी के 6 प्राणायामों के सेट का हिस्सा है और इस सेट का अभ्यास पूरे भारत के साथ-साथ दुनिया के बाकी हिस्सों में भी फैला है !

कपालभाति क्या है

कपालभाति योग प्रणाली प्राणायाम का एक हिस्सा है जिसे शरीर की सफाई की जाती है ! कपालभाति शब्द दो शब्दों से मिल कर बना है: कपाल का अर्थ है 'माथा' और भाति का अर्थ है 'तेज'! कपालभाति का अभ्यास करने से चेहरा पर चमक से उत्पन्न तेज रहता है ! प्रक्रिया के कारण मस्तिष्क अच्छे तरह से प्रभावित होते हैं ! कपालभाति में छोटी और मजबूत बलवर्धक साँसें शामिल हैं !

कपालभाति प्राणायाम कितने प्रकार का होता हैं 

1. वातकृपा कपालभाति यह भस्त्रिका प्राणायाम के समान है इस का अभ्यास करते समय साँस रोकना और छोड़ना सक्रिय होता है !
2. विमुक्तकर्म कपालभाति जल जालि के समान होता है इसमें नाक के माध्यम से पानी लिया जाता है और मुँह से बाहर निकलना शामिल है !
3. शीतकर्मा कपालभाती को विमुक्तकर्म कपालभाति का उलटा माना जा सकता है, जिसमें पानी मुंह से अंदर फिर नाक दवार बाहर निकाल दिया जाता है !

कपालभाति कब करे 

कपालभाति का अभ्यास खाली पेट (भोजन के कम से कम तीन से चार घंटे बाद) किया जाना चाहिए, इस लिए आप सुबह उठने के बाद भी कर सकते है !
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कपालभाति प्राणायाम कैसे करें 

1. आराम से रीढ़ को सीधा रखते हुए बैठें ! यदि आप एक कुर्सी पर बैठे हैं, तो सुनिश्चित करें कि दोनों पैरों को जमीन पर रखें !
2. शुरू करने से पहले अपनी नाक के दोनों छिद्रों के माध्यम से एक गहरी श्वास लें ! साथ ही पेट को भी अंदर की और बहार की ओर धकेले !
3. अपने फेफड़ों से सभी हवा को निष्कासित करें !
4. इस चक्र को 10 बार लगतार रहे, फिर अपनी श्वास को सामान्य स्थिति में आने दें !

कपालभाति प्राणायाम के लाभ 

1. कपालभाति का नियमित अभ्यास करने वाले अधिकांश लोग आपको नियमित रूप से बताएंगे कि उनमे ऊर्जा में वृद्धि हुई है ! चलिए जानते है कपालभाति प्राणायाम के फायदे बार मे और इसे करने से क्या क्या लाभ होता है !
2. यह अतिरिक्त वात, पित्त और कफ को संतुलित करता है!
3. फेफड़ों और श्वसन प्रणाली को साफ करता है !
4. परिसंचरण में सुधार, विशेष रूप से सिर में होता है !
5. मानसिक विकारों को दूर करने में मदद करता है !
6. अनिद्रा को दूर करता है, शरीर और मस्तिष्क में स्फूर्ति आती है !
7. माथे को ठंड रखता है !
8. इसका अभ्यास करने से पाचन अंगों में सुधार और भूख में सुधार होता है !
खून को साफ करता है !
विषाक्त पदार्थों को शरीर से मुक्त करता है !
रक्त कोशिकाओं में ऑक्सीजन को बढ़ाता है और रक्त को शुद्ध करता है !

कपालभाति से सावधानियाँ

1. कपालभाति का अभ्यास गर्भवती या मासिक धर्म वाली महिलाओं को नहीं करना चाहिए !
2. यदि आपको उच्च रक्तचाप, एसिड गैस्ट्रिक, हृदय रोग या पेट दर्द है, तो कपालभाति का अभ्यास न करें !
3. अगर आपको चक्कर या बेचैनी महसूस होती है तो अभ्यास धीमा या बंद करें !

Kapalbhati Pranayama

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Kapalbhati Pranayama is a type of breathing exercise that helps you get rid of various diseases.
Of course we know it from the Yoga Sutras of Sage Patanjali, but its popularity has increased due to Ramdev Swamiji. Kapalabhati Yoga Pranayama is part of Ramdev Swamiji's set of 6 pranayams and the practice of this set is spread all over India as well as the rest of the world.

What is Kapalbhati

The Kapalbhati Yoga system is a part of Pranayama that cleanses the body. The word Kapalbhati is made up of two words: Kapal means 'forehead' and Bhati means 'fast'. Practicing Kapalbhati keeps the glow produced on the face sharp. The brain is well affected due to the process. Kapalbhati includes short and strong powerful breaths.

What is the type of Kapalbhanti Pranayama?

1. Vatakrupa Kapalbhati This is similar to Bhastrika Pranayama while breathing this while breathing and exhaling is activated!
2. Vichitakram kapalbhati water is similar to water lattice.It involves taking water through the nose and coming out of the mouth.
3. Sheetkarma Kapalbhati can be considered as a reversal of the liberated work Kapalbhati, in which water is removed from the mouth and then through the nose.

When to do Kapalbhati

Kapalbhati should be practiced on an empty stomach (at least three to four hours after meals), so you can do it even after waking up in the morning.

How to do Kapalbhati Pranayama

1. Sit comfortably keeping the spine straight. If you are sitting in a chair, make sure to keep both feet on the ground.
2. Take a deep inhalation through both pores of your nose before starting! Also push the stomach in and out.
3. Expel all the air from your lungs.
4. Continue this cycle 10 times, then let your breathing return to normal.

Benefits of Kapalbhati Pranayama

1. Most people who practice Kapalbhati regularly will tell you regularly that they have increased energy! Let us know the benefits of Kapalbhati Pranayama in the bar and what is the benefit of doing it.
2. It additionally balances Vata, Pitta and Kapha.
3. Cleans the lungs and respiratory system!
4. Improves circulation, especially in the head.
5. Helps to overcome mental disorders.
6. Relieves insomnia, energizes body and brain.
7. Keeps the forehead cold.
8. Practicing this improves digestive organs and improves appetite.
Cleans the blood.
Releases toxins from the body.
Increases oxygen in blood cells and purifies blood.

Kapalbhati of  precautions

1. Pregnant or menstruating women should not practice Kapalbhati.
2. If you have high blood pressure, acid gastric, heart disease or stomach pain, do not practice Kapalbhati.
3. If you feel dizzy or restless, slow down or stop the practice.

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